तेहरान/इस्लामाबाद: पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को बातचीत के लिए एक नया प्रस्ताव सौंपा है। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, यह प्रस्ताव गुरुवार शाम पाकिस्तान को दिया गया, जो इस समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। यह घटनाक्रम ऐसे समय पर हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह ईरान के हालिया प्रस्ताव को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने अपने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों के साथ बैठक में इस प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और कहा कि इसे स्वीकार करना मुश्किल है।
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ईरान के प्रस्ताव में क्या है?
ईरान के प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य में समुद्री यातायात बहाल करने की बात कही गई है। हालांकि, ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े अहम मुद्दों को भविष्य की बातचीत के लिए टाल दिया है। अमेरिकी अधिकारियों को इस बात की चिंता है कि अगर जलमार्ग को बिना परमाणु कार्यक्रम पर ठोस समाधान के खोल दिया गया, तो इससे अमेरिका का कूटनीतिक दबाव कमजोर हो जाएगा। खासकर ईरान के 'लगभग परमाणु बम बनाने लायक यूरेनियम भंडार' को लेकर अमेरिका सतर्क है। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखा जाता है, तो इससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, जिसका असर अमेरिकी ईंधन कीमतों पर भी पड़ रहा है। यानी जलमार्ग खोलने और बंद रखने, दोनों ही स्थितियों में जोखिम मौजूद है।
पिछले हफ्ते रद्द हुई थी वार्ता
बता दें कि पिछले हफ्ते इस्लामाबाद में होने वाली अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता भी रद्द हो गई थी। ईरानी प्रतिनिधिमंडल, जिसका नेतृत्व विदेश मंत्री अब्बास अरगची कर रहे थे, बीते शनिवार की शाम पाकिस्तान से लौट गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने पाकिस्तान के नेताओं को अपनी मांगों की एक आधिकारिक सूची सौंपी थी, जिसमें अमेरिका और इजरायल के लिए शर्तें रखी गई थीं। इसके बाद ट्रंप ने अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल का प्रस्तावित दौरा भी रद्द कर दिया था। इस दल का नेतृत्व विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और उनके वरिष्ठ सलाहकार व दामाद जेरेड कुशनर करने वाले थे। इस घटनाक्रम से पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा था। इससे पहले इस्लामाबाद में हुई पहली दौर की वार्ता भी नाकाम रही थी।